History Of Cryptography in Hindi

History of Cryptography in Hindi

आपने कभी सोचा है कि राजा-महाराजा अपने गुप्त संदेश कैसे भेजते थे? या फिर जासूस किस तरह दुश्मनों की बातें सुन लेते थे? इसका राज छिपा है एक खास विज्ञान में – क्रिप्टोग्राफी (Cryptography) में!

जी हां, गुप्त लेखों की ये कला सदियों पुरानी है और इसने इतिहास के कई महत्वपूर्ण मोड़ों को आकार दिया है. आज हम उसी रोमांचक सफर पर निकलेंगे और देखेंगे कि कैसे भारत से लेकर पूरी दुनिया तक, क्रिप्टोग्राफी ने अपनी छाप छोड़ी है.

प्राचीन काल के रहस्य:

हमारी कहानी शुरू होती है हजारों साल पहले, मिस्र की प्राचीन सभ्यता से. वहां की दीवारों पर बनी हाइरोग्लिफ्स में ही हमें गुप्त संदेशों के शुरुआती रूप मिलते हैं. यूनानियों ने भी “स्काइलेट” नामक तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें लकड़ी की एक छड़ी के चारों ओर पट्टी लपेटकर उस पर लिखा जाता था. छड़ी खोलने पर ही असली संदेश सामने आता था!

भारत में भी क्रिप्टोग्राफी का इतिहास उतना ही गौरवशाली है. संस्कृत ग्रंथों में “छायालेख” और “भंजनीय लेख” की अवधारणाओं का उल्लेख मिलता है, जो संदेशों को छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाती थीं.

मध्यकाल की कूटनैतिक चालें:

युद्ध और कूटनीति के खेलों में क्रिप्टोग्राफी का महत्व और बढ़ गया. राजाओं और जासूसों ने एक-दूसरे को धोखा देने के लिए जटिल सिफर और कूट विकसित किए. इटली में “सीज़र सिफर” का इस्तेमाल होता था, जिसमें अक्षरों को एक निश्चित क्रम में बदल दिया जाता था. वहीं, भारत में “नितीसार संग्रह” और “चक्रव्यूह ग्रंथ” जैसे ग्रंथों में कूटलेखन के तरीकों का विस्तार से वर्णन मिलता है.

आधुनिक युग का तकनीकी विस्फोट:

19वीं और 20वीं शताब्दी में, क्रिप्टोग्राफी ने विज्ञान और तकनीक के साथ कदमताल मिलाया. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एनिग्मा मशीन क्रिप्टोग्राफी का एक कुख्यात उदाहरण है. इस जटिल मशीन को तोड़ने के लिए मित्र राष्ट्रों के वैज्ञानिकों ने दिन-रात मेहनत की और आखिरकार सफल भी हुए. इस घटना ने साबित कर दिया कि क्रिप्टोग्राफी युद्ध जीतने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

डिजिटल दुनिया की चुनौतियां:

आज इंटरनेट के युग में, क्रिप्टोग्राफी का महत्व और भी बढ़ गया है. ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया – सब कुछ सुरक्षित संचार पर निर्भर करता है. यही वजह है कि क्रिप्टोग्राफी विशेषज्ञ लगातार नए और अधिक सुरक्षित एन्क्रिप्शन तरीके खोज रहे हैं. भारत सरकार भी डिजिटल इंडिया पहल के तहत क्रिप्टोग्राफी को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है.

भविष्य का रोमांच:

क्रिप्टोग्राफी का भविष्य भी उतना ही रोमांचक है. क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे तकनीकों के आने से भविष्य में वर्तमान के एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल कमजोर पड़ सकते हैं. इसलिए, क्रिप्टोग्राफर लगातार नई चुनौतियों का सामना करने और उन्हें हल करने के लिए तैयारी कर रहे हैं.

तो अगली बार जब आप इंटरनेट पर कोई काम करते हैं, तो याद रखिएगा कि आपके डेटा की सुरक्षा के पीछे क्रिप्टोग्राफी का जादू छिपा है! ये सदियों पुराना विज्ञान आज भी हमें सुरक्षित रूप से जुड़े रहने में मदद करता है.

भारत से लेकर विश्व तक, क्रिप्टोग्राफी ने इतिहास के कई महत्वपूर्ण मोड़ों को आकार दिया है. आइए, इस लेख के अंत में इतिहास के कुछ और रोचक पहलुओं पर नज़र डालें:

  • हिंदी सिनेमा में क्रिप्टोग्राफी: फिल्मों में भी क्रिप्टोग्राफी के रोमांच को दिखाया गया है. धूम, 3, और वॉर जैसी फिल्मों में गुप्त संदेशों और कोडों का इस्तेमाल कहानी का अहम हिस्सा होता है.
  • भारतीय क्रिप्टोग्राफी विशेषज्ञ: भारत ने कई प्रतिभाशाली क्रिप्टोग्राफी विशेषज्ञों को जन्म दिया है. प्रोफेसर एस. आर. भिडे ने भारत के पहले आधुनिक सिफर का निर्माण किया था और भारत सरकार को क्रिप्टोग्राफी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.
  • भविष्य के नायक: आने वाले वर्षों में क्रिप्टोग्राफी का महत्व और बढ़ेगा. क्वांटम कंप्यूटर से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए नए, और भी जटिल एन्क्रिप्शन तरीकों की खोज होनी है. ऐसे में युवा क्रिप्टोग्राफी विशेषज्ञों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी.

तो याद रखिएगा, गुप्त लेखों की ये रहस्यमय दुनिया लगातार बदलती रहती है. हमें भी सतर्क रहकर, क्रिप्टोग्राफी के नए विकासों के बारे में सीखते रहना चाहिए. आखिरकार, इंटरनेट की इस डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए हमें क्रिप्टोग्राफी के हीरो को पहचानना और उनका सम्मान करना आता चाहिए!

मुझे उम्मीद है कि आपको “History of Cryptography in Hindi” पर आधारित यह लेख पसंद आया होगा. अगर आपके मन में कोई सवाल या सुझाव हों, तो मुझे ज़रूर बताएं!

 

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